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अप्रैल 25, 2013

क्यूँ मर रहा है बे? क्रिकेट है ना !!

भारत सरकार में बैठे लोगों जैसे क्रांतिकारी ना तो आजतक देखे गए हैं और ना ही शायद देखे जायेंगे ... इनके पास हर समस्या का इलाज है, इनके नजरिये से भूतकाल की समस्याओं का समाधान -

ज्यादा पीछे ना जाकर १८५७ से शुरू करते हैं खबर यूँ होती -

"अंग्रेजी लूटमार" टीम और भारत के "राजे राजवाडा लूटमार" टीम में देश की समस्याएँ सुलझाने के लिए क्रिकेट लीग जल्द ही शुरू होगी तब तक सभी लोग शान्ति से रहते हुए लगान समय पर देते रहें भले ही खुद के खाने के दाने ना हों!

१९१४ -
ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकारी की हत्या से उपजे विवाद के समाधान के लिए वो सर्बिया के साथ क्रिकेट की टेस्ट सीरिज खेल रहा है. रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी ऑस्ट्रिया और सर्बिया की टेस्ट सीरिज में शामिल हुए, खेल के लिए नए स्टेडियम एशिया और अफ्रीका में तलाशे जा रहे हैं

टर्की और अमेरिका ने भी अपने खिलाड़ी टेस्ट सीरिज में भेजे, नए मैचों की संख्या बढती ही जा रही है

१९१९-
टर्की में अंग्रेजों और वहां के निवासियों के बीच खलीफा क्रिकेट सीरिज शुरू.

मोहनदास गांधी ने टर्की के समर्थन में भारत में भी अंग्रेजों के साथ खिलाफत क्रिकेट सीरिज शुरू की जिसमें नोआखाली एवं अन्य स्टेडियम में दंगे भड़कने से हजारों लोग जिनका क्रिकेट से कुछ लेना देना नहीं था, मारे गए

इसी क्रम को जारी रखते हुए वर्त्तमान में आते हैं ...

२०१३
चीन ने भारत की जमीन हथियाई, राजीव शुक्ला भारी मात्रा में क्रिकेट प्रशिक्षक लेकर चीन रवाना वो वहां क्रिकेट खेलना सिखायेंगे फिर भारत चीन को तगड़ा वाला सबक सिखाएगा ...

आप महंगाई से परेशान हैं? क्रिकेट खेलिए
आप अपराधों से परेशान हैं? आप झूठ बोल रहे हैं, देखिये आईपीएल कितना "स्मूदली" जा रहा है किधर हैं अपराध कहाँ है अपराध?
किसान आत्महत्या कर रहे हैं! अबे किसान क्यूँ मर रहा है? क्रिकेट है ना देख उसे!!


अप्रैल 24, 2012

भारत सरकार बनाम माइनो परिवार का रामू काका

google जिसका आइडिया दो डेवलपर्स को स्टेनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के एक प्रोजेक्ट पे काम करते समय 96 में आया जिसे NSF फ़ंड दे रहा था ( यही सारी फ़ेडरल एजेंसीज को फ़ंड देता है, और ध्यान रहे आज उसके पास आपकी सभी सूचनाओं का एक विशाल डेटाबेस है), शुरूआत में google google.stanford.edu पर पाया जाता था।

1997 में google.com डोमेन रजिस्टर करवाया गया और 1998 में एक मित्र के गैराज से Google Inc. शुरू की गई।

तब से लेकर अब तक ये एक बैकबोन बन चुकी है, ये आपके बारे में लगभग सभी सूचनायें रखती है, आपके मेल्स, आपके द्वारा विजिटेड साइट्स से लेकर आपके और आपके सर्किल के लोगों के नाम, नंबर, etc. etc.

गूगल और फ़ेसबुक जैसी साइट्स पे उपलब्ध सूचनायें फ़ेडरल एजेंसीज के साथ साझा की जाती है। खैर ये सब हुई बेमतलब की बातें, अब मजेदार बात पे आते हैं कि कैसे ये इसकी भी जय जय, उसकी भी‌ जय जय कर के हर जगह अपना कारोबार चलाता है, सिर्फ़ इन तीन स्क्रीन शोट्स पे नजर डालें, जो कि गूगल इंडिया, गूगल चाइना और गूगल.कोम से लिये गये हैं -

गूगल इंडिया - J&K और भारत की सीमाओं पे ध्यान दें


















दूसरा स्क्रीन शोट है - गूगल चाइना - J&K और चाइना की सीमारेखा पे ध्यान दें -



















तीसरा स्क्रीन शोट है गूगल वर्ल्ड का या google.com का - पिछली अंतर्राष्ट्रीय सीमा रेखाओं से इसकी तुलना करें -



















आया कुछ समझ में कि बिजनेस कैसे किया जाता है? या विशेषकर भारत जैसे देश खुद को कैसे दिन में भी अंधेरे में रखते हैं? भारत सरकार को अपने मंत्रियों की सेक्स सीडियों से निपटने से फ़ुर्सत मिले, मीडिया को खुद के घोटालों पे ना बोलने के लिये पटाये रखने से फ़ुर्सत मिले, देश के लिये उठने वाली आवाजों को दबाने से फ़ुर्सत मिले, इटली की गुलामी से फ़ुर्सत मिले तब तो भारत सरकार भारत के लिये सोचे कुछ करे, पर अफ़सोस कभी‌ तो ये खुद को सर्वशक्तिमान समझने वाली सरकार कोर्ट को हलफ़नामा देकर कहती है कि राम काल्पनिक थे और कभी कोर्ट को कहती है कि इटली के जिन नाविकों ने भारतीय मछुआरों‌ की हत्या की उनको पकडने का केरल सरकार या भारत को अधिकार नहीं !!!

ये भारत सरकार है या माइनो परिवार का रामू काका?

(c) Naresh Panwar. I am sharing this blog post with Creative Commons no-deriv, no-commercial license. मेरी सारी ब्लोग पोस्ट को किसी भी डिजिटल या प्रिंट मीडिया में बिना लिखित परमिशन के पब्लिश या ब्रोडकास्ट की अनुमति नहीं है, पर इस ब्लोग पोस्ट "भारत सरकार बनाम माइनो परिवार का रामू काका" को आप प्रिंट या डिजिटल मीडिया पर जो कि कमर्शियल ना हो में शेयर कर सकते हैं, मुझे कोई आपत्ति नहीं है।